Best Collection of Hindi Bal Kavita Poems, Latest Hindi Bal Kavita Poems

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hindi bal kavita new

 प्रेम की
परिभाषा
तुम बता गए,
जाने-अनजाने
द्वार पर मन के तुम
कब आ गए!
पहली बार भी
अजनबी तुम,
कभी नहीं मालूम हुए,
सदियों से जो
निभा रहे थे,
रिश्‍ते सम्‍मुख आ गए।
नजरों ने नजरों को छू लिया,
कहने की कुछ बात
नहीं थी,
मौन प्रेम की भाषा होती
नजरों से तुम
सिखा गए।

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 शब्द लहरों की तरह
हुड़दंग मचाए
झाग में नमक संभाले
दौड़ लगाते हैं
सिर के बालों की तरह बिखरे दिखते
जड़ों से मजबूत बने रहते हैं
भीतर हंसते फटते
जख्मी करते रहते हैं
मैं हड्डियों को बचाती रहती हूं कहीं
उनसे चिपके न रह जाएं सिर की जुओं की तरह चुन-चुन कर
उन्हें बाहर निकालती रहती हूं

Poem Submitted By : Dil Comments

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 निकले थे बाजार जेब में उनके कुछ थे पैसे
करना था व्यापार
एक दुकान थी बड़ी सजीली
वहां बनी थी गर्म जलेबी
मामा का मन कुछ यूं ललचाया
क्या लेना था याद न आया
गर्म जलेबी खाई झट से
जीभ जल गई फट से, लप से
फेंका कुर्ता फेंकी टोपी
और भागे फिर घर को
दोबारा फिर खाने जलेबी
कभी न गए उधर को।

Poem Submitted By : Dil Comments

कि जी रहा हूं जिस तरह-best latest hindi bal kavita

 रोज यह संकल्प
कि जी रहा हूं जिस तरह
उससे कुछ हटकर जिऊं
रोज यह उदासी कि
एक और दिन बीत चला
संकल्प और उदासी के बीच
जिया मैंने जीवन
सौ-सौ विकल्पों के साथ
पर नहीं चुना कोई विकल्पन ‍ही जिया कोई जोखिम
यहां तक कि
मुझे करना था प्रेम
नहीं किया
मैं सीधा चला आया
कविता में
प्रेम और मृत्यु से बचता हुआ।

Poem Submitted By : Dil Comments

धूल के कण सूरज-new latest hindi bal kavita

 धूल के कण सूरज के प्रकाश में
उड़ रहे हैं
सुबह को छीन मेरा दानव
कहीं छिप गया है
अफसोस का प्रहरी
दिन भर चक्कर लगाता रहता है
मेरी उदासी
पेड़ों के नीचे पानी को खड़ा देख
भागती है पूर्व की ओर
सूरज के पिछले हिस्से में जा
छिप जाती हैमैं खुशी से ओत प्रोत हो उठती हूं।

Poem Submitted By : Dil Comments

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