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मेरा पहलू बनो तुम और मैं आगोश हो जाऊं,
दिल की हर बात कह दूं और फिर खामोश हो जााऊं।
किसी प्याले की कूव्वत ही कहाँ, बहका सकेे मुुझको..,
निगाहों से जरा हँस दो ..कि मैैं ..मदहोश हो जाऊं।
तुम्हारा रंग जो मिल जाये मुझ में… मैं भी खिल जाऊं,
पड़ो तुम धूप बन के सुबह की.. मैं ओस हो जाऊं।
परत इक धूल की जम सी गयी है मेरे दामन पर..,
अगर तुम बूंद बन जाओ तो मैं फिरदौस हो जाऊं।

Poem Submitted By : Dil Comments

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